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AIDS से बचने की नई दवा विकसित हुई , सेक्स वर्कर के लिए वरदान

Sex Worker के लिए मेडिकल साइंस ने एक अनोखा तोहफा दिया है । लेकिन यहा भी काफी विवाद हो रखा है।

दुनिया भर में Sex Worker में एचआईवी (AIDS) संक्रमण का खतरा 30 गुना अधिक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 6% यौनकर्मी एचआईवी संक्रमित हैं ।

हाल ही में एक ऐसी दवा विकसित हुई है जो AIDS को होने ही नही देता , यानि की इस इंजेक्शन को साल में दो बार लगाने से AIDS से बचा जा सकता है मतलब जिसने ये दो इंजेक्शन लगा रखी है उसको HIV संक्रमित के साथ Sex करने पर भी AIDS होने का खतरा नही है ।

यह मामला एचआईवी की एक नई दवा, लेनाकापाविर, से जुड़ा है ।भारत में एचआईवी से प्रभावित लोगों के लिए काम करने वाली एक सामाजिक संस्था, संकल्प, ने एक अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी, गिलीड साइंसेज, के खिलाफ पेटेंट आवेदन का विरोध किया है

संकल्प का कहना है कि गिलीड द्वारा पेटेंट के लिए किए गए आवेदन एक पुराने यौगिक (compound) पर आधारित हैं, और भारतीय पेटेंट कानून के अनुसार, यह कोई नई खोज नहीं मानी जा सकती। भारत का पेटेंट कानून 'एवर्ग्रीनिंग' को रोकता है, यानी दवा कंपनियां छोटे-छोटे बदलाव करके अपने पेटेंट को बार-बार नया नहीं कर सकतीं, जिससे दवा की मोनोपॉली (एकाधिकार) बढ़ जाए।

अगर गिलीड को पेटेंट मिल जाता है, तो यह पेटेंट अगस्त 2038 तक चलेगा। इससे भारत में सस्ती जेनेरिक (समान संरचना वाली) दवाओं का निर्माण रुक सकता है, और लोगों को महंगी दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस बारे में संकल्प रिहैबिलिटेशन ट्रस्ट के निदेशक एल्ड्रेड टेलिस का कहना है, सस्ती जेनेरिक एचआईवी दवाएं दुनियाभर में, खासकर भारत में, लोगों की ज़िंदगी बचाने में महत्वपूर्ण रही हैं।

लेनाकापाविर की कीमत अमेरिका में $42,250 प्रति वर्ष है, लेकिन लिवरपूल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि अगर इसे भारत में जेनेरिक रूप में बनाया जाए, तो इसकी कीमत $100 प्रति वर्ष हो सकती है, और आगे चलकर यह $40 प्रति वर्ष तक कम हो सकती है।

इस विवादित मामले पर भारतीय पेटेंट कार्यालय जल्द ही सुनवाई करेगा। अगर गिलीड को पेटेंट मिल जाता है, तो इससे सस्ती दवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी, जो एचआईवी से लड़ने के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। दूसरी ओर, अगर पेटेंट रद्द होता है, तो भारत में सस्ती जेनेरिक दवाओं का उत्पादन संभव हो सकेगा, जिससे एचआईवी के मरीज़ों को सस्ता और प्रभावी इलाज मिल सकेगा।

मुझे लगता है पेटेंट मिल जाएगा , कपाउंड भले ही पहले से चला आ रहा हो लेकिन AIDS रोकने के लिए गिलिड ने बड़ी संख्या में ट्राइल भी किया होगा और पुराने कपाउंड को नए उपचार में पेश किया है ।


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